अहमदगढ़, 24 फरवरी। धर्म और राजनीति के बीच बढ़ती बयानबाज़ी के माहौल में शंकराचार्य पद की गरिमा को लेकर एक नई बहस खड़ी हो गई है। अहमदगढ़ के पंडित नवदीप शर्मा ने इस विषय पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए सनातन समाज से संयम और एकजुटता बनाए रखने की अपील की है।
पंडित नवदीप शर्मा ने कहा कि शंकराचार्य की गद्दी पर वही व्यक्ति आसीन होना चाहिए, जो निर्भीक होकर धर्म की बात कर सके और राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर सनातन सिद्धांतों की रक्षा करे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कुछ लोग धार्मिक व्यक्तित्वों को किसी राजनीतिक दल से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जो अनुचित है। उनके अनुसार, किसी संत या शंकराचार्य को दलगत राजनीति के दायरे में बांधना न केवल गलत है, बल्कि धार्मिक मर्यादा के विरुद्ध भी है।
उन्होंने यह भी कहा कि धर्म संसद के माध्यम से की गई टिप्पणियों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। पंडित शर्मा ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सनातन परंपराओं की रक्षा के लिए समाज को सजग और संगठित रहना होगा।
गौ संरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने उत्तर प्रदेश में पूर्ण गोहत्या प्रतिबंध की आवश्यकता जताई और कहा कि गौमाता को राज्य माता का दर्जा देने की अपेक्षा गलत नहीं है। यदि ऐसा होता है तो यह एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगा। साथ ही उन्होंने धार्मिक मंचों से संयमित भाषा के प्रयोग पर भी बल दिया।
अंत में पंडित नवदीप शर्मा ने सनातन समाज से आग्रह किया कि वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट हो। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पद की गरिमा और सनातन मूल्यों की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।
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