कैलगिरी, 25 मार्च
कनाडा में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। देश के वर्तमान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 28 अप्रैल को संसदीय चुनाव कराने की घोषणा कर दी है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब देश अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की व्यापारिक नीतियों के कारण आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।
प्रधानमंत्री कार्नी ने ओटावा में गवर्नर जनरल से मुलाकात के बाद संसद भंग करने की अनुमति मांगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि कनाडा अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। कार्नी ने जोर देकर कहा, “हमें एक नई अर्थव्यवस्था की आवश्यकता है जो हर कनाडाई के लिए काम करे। मैं कनाडा के लोगों से एक मजबूत जनादेश चाहता हूं ताकि हम वर्तमान चुनौतियों का सामना कर सकें और देश को एक नई दिशा दे सकें।
“चुनावी विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव पहले अक्टूबर में होना था, लेकिन कार्नी ने समय से पहले चुनाव कराने का निर्णय लिया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द चुनाव कराने के पीछे लिबरल पार्टी की रणनीति है। हाल के सर्वेक्षणों में लिबरल पार्टी को 37.8 प्रतिशत का समर्थन मिला है, जबकि कंजर्वेटिव पार्टी 37.2 प्रतिशत के साथ बेहद करीब है।इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि संसद में पांच नई सीटें जोड़ी गई हैं, जिससे कुल सीटों की संख्या बढ़कर 343 हो गई है। कार्नी खुद नेपियन की ओटावा सीट से चुनाव लड़ेंगे, जहां पिछले एक दशक से लिबरल सांसद चंद्र आर्या का प्रभुत्व रहा है।
आर्या को दो महीने पहले ही पार्टी नेतृत्व के लिए उनकी उम्मीदवारी को खारिज कर दिया गया था और पिछले सप्ताह उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।इस चुनाव को लेकर कनाडा के विभिन्न क्षेत्रों में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव कनाडा के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
आने वाले दिनों में देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों को लेकर गहन बहस होने की संभावना है। कनाडा के लोग अब इस बात पर नजर टिकाए हुए हैं कि आगामी चुनाव में कौन सी पार्टी बाजी मारती है और देश की बागडोर किसके हाथ में जाती है।